noor chehre se yuñ chhalakta hai | नूर चेहरे से यूँँ छलकता है


  - SALIM RAZA REWA

नूर चेहरे से यूँँ छलकता है

जैसे सूरज कोई चमकता है

इक दफ़ा ख़्वाब में वो क्या आया

घर मेरा अब तलक महकता है

क्या कशिश है तुम्हारी आँखों में
देखकर तुमको दिल धड़कता है

उसकी दिलकश अदा हसीं चेहरा 

सबकी नज़रों में क्यूँँ खटकता है
'इश्क़ के जब हथौड़े पड़ते हैं
दर्द-ए-दिल आँखों से छलकता है

अब तलक इन ज़ईफ़ आँखों में
सिर्फ़  तेरा  बदन चमकता है

  - SALIM RAZA REWA

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