
ज़रा सी बात पे रिश्तों को कर दिया घाइल
ज़रा सी बात को ले कर उदास बैठे हैं
तेरे बग़ैर हर इक शय की आँख पुरनम है
हमीं नहीं मह-ओ-अख़्तर उदास बैठे हैं
— SALIM RAZA REWA
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