use maaloom hai apni haqeeqat bhi fasana bhi | उसे मालूम है अपनी हक़ीक़त भी फ़साना भी

  - SALIM RAZA REWA

उसे मालूम है अपनी हक़ीक़त भी फ़साना भी
हमारे दिल में था अक्सर उसी का आना जाना भी 

बुलन्दी मेरे जज़्बे की ये देखेगा ज़माना भी

फ़लक के सहन में होगा मेरा इक आशियाना भी

अकेले इन बहारों का नहीं लुत्फ़-ओ-करम साहिब
करम-फ़रमा हैं मुझ पर कुछ मिज़ाज-ए-आशिक़ाना भी

जहाँ से कर गए हिजरत मोहब्बत के सभी जुगनू
वहाँ पर छोड़ देती हैं ये ख़ुशियाँ आना जाना भी

बहुत अर्से से देखा ही नहीं है रक़्स चिड़ियों का

कहीं पेड़ों पे अब मिलता नहीं वो आशियाना भी


हमारे शे'र महकेंगे किसी दिन उसकी रहमत से

हमारे साथ महकेगा अदब का कारख़ाना भी 


न जाने किन ख़यालों में नहाकर मुस्कुराती है

'रज़ा' आता नहीं है राज़-ए-दिल उसको छुपाना भी

  - SALIM RAZA REWA

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