teraa hansna ghazab muskurana ghazab teraa chilman men chehra chhup | तेरा हँसना ग़ज़ब मुस्कुराना ग़ज़ब  तेरा चिलमन में चेहरा छुपाना ग़ज़ब

  - SALIM RAZA REWA

तेरा हँसना ग़ज़ब मुस्कुराना ग़ज़ब  तेरा चिलमन में चेहरा छुपाना ग़ज़ब
देखकर क्यूँँ न दिल गुनगुनाने लगे तेरी हर इक अदा शायराना ग़ज़ब

 
डालियाँ झूमकर गुनगुनाने लगीं हर कली देखकर मुस्कराने लगी

दिल धड़कने लगा है हर इक फूल का तेरा बन-ठन के गुलशन में आना ग़ज़ब
 

उफ़ ये लाली ये शोख़ी ये चंचल नयन फूल से भी है नाज़ुक ये तेरा बदन
इक तो तेरी अदाऍं हैं क़ातिल बड़ीं उसपे मौसम भी है आशिक़ाना ग़ज़ब

 
इस क़दर नूर रुख़ से चमकने लगा हुस्न भी देखकर हाथ मलने लगा         

चाल नागन सी घायल करे है जिया उस पे मुखड़ा तेरा है सुहाना ग़ज़ब
 

रब से माँगा था जो वो ख़ुशी मिल गई आप क्या मिल गए ज़िंदगी मिल गई
खिल उठे हैं  रज़ा फूल ख़ुशियों के अब मिल गया प्यार का इक ख़ज़ाना ग़ज़ब

  - SALIM RAZA REWA

More by SALIM RAZA REWA

As you were reading Shayari by SALIM RAZA REWA

Similar Writers

our suggestion based on SALIM RAZA REWA

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari