vo log jo zinda hain vo mar jaayenge ik din | वो लोग जो ज़िंदा हैं वो मर जाएँगे इक दिन

  - Saqi Faruqi

वो लोग जो ज़िंदा हैं वो मर जाएँगे इक दिन
इक रात के राही हैं गुज़र जाएँगे इक दिन

यूँँ दिल में उठी लहर यूँँ आँखों में भरे रंग
जैसे मिरे हालात सँवर जाएँगे इक दिन

दिल आज भी जलता है उसी तेज़ हवा में
ऐ तेज़ हवा देख बिखर जाएँगे इक दिन

यूँँ है कि तआक़ुब में है आसाइश-ए-दुनिया
यूँँ है कि मोहब्बत से मुकर जाएँगे इक दिन

यूँँ होगा कि इन आँखों से आँसू न बहेंगे
ये चाँद सितारे भी ठहर जाएँगे इक दिन

अब घर भी नहीं घर की तमन्ना भी नहीं है
मुद्दत हुई सोचा था कि घर जाएँगे इक दिन

  - Saqi Faruqi

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