Saqi Faruqi

Saqi Faruqi

@saqi-faruqi

Saqi Faruqi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Saqi Faruqi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

दुनिया पे अपने इल्म की परछाइयाँ न डाल ऐ रौशनी-फ़रोश अँधेरा न कर अभी — Saqi Faruqi
मुझ को मिरी शिकस्त की दोहरी सज़ा मिली तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी दुनिया से जा मिली — Saqi Faruqi
अब घर भी नहीं घर की तमन्ना भी नहीं है मुद्दत हुई सोचा था कि घर जाएँगे इक दिन — Saqi Faruqi
ये क्या तिलिस्म है क्यूँँ रात भर सिसकता हूँ वो कौन है जो दियों में जला रहा है मुझे — Saqi Faruqi
बुझे लबों पे है बोसों की राख बिखरी हुई मैं इस बहार में ये राख भी उड़ा दूँगा — Saqi Faruqi
ये ख़ामुशी का ज़हर नसों में उतर न जाए आवाज़ की शिकस्त गवारा न कर अभी — Saqi Faruqi
इक याद की मौजूदगी सह भी नहीं सकते ये बात किसी और से कह भी नहीं सकते — Saqi Faruqi
मुद्दत हुई इक शख़्स ने दिल तोड़ दिया था इस वास्ते अपनों से मोहब्बत नहीं करते — Saqi Faruqi
मुझ में सात समुंदर शोर मचाते हैं एक ख़याल ने दहशत फैला रक्खी है — Saqi Faruqi

Ghazal

मैं तेरे ज़ुल्म दिखाता हूँ अपना मातम करने के लिए मेरी आँखों में आँसू आए तिरी आँखें नम करने के लिए मिट्टी से हुआ मंसूब मगर आतिश-ख़ाना सा जलता हूँ कई सूरज मुझ में डूब गए मेरा साया कम करने के लिए वो याद के साहिल पर सारे मोती बिखराए बैठी थी इक लहर लहू में उट्ठी थी मुझे ताज़ा-दम करने के लिए आज अपने ज़हरस काट दिया सब ज़ंग पुराने लफ़्ज़ों का आइंदा के अंदेशों की तारीख़ रक़म करने के लिए मुमकिन है कि अब भी होंटों पर कोई भूला बिसरा शो'ला हो मैं जलते जलते राख हुआ लहजा मद्धम करने के लिए — Saqi Faruqi

Nazm

"सुर्ख़ गुलाब और बदर-ए-मुनीर" ऐ दिल पहले भी तन्हा थे, ऐ दिल हम तन्हा आज भी हैं और उन ज़ख़्मों और दाग़ों से अब अपनी बातें होती हैं जो ज़ख़्म कि सुर्ख़ गुलाब हुए, जो दाग़ कि बदर-ए-मुनीर हुए इस तरहा से कब तक जीना है, मैं हार गया इस जीने से कोई अब्र उड़े किसी क़ुल्ज़ुम से रस बरसे मिरे वीराने पर कोई जागता हो कोई कुढ़ता हो मिरे देर से वापस आने पर कोई साँस भरे मिरे पहलू में कोई हाथ धरे मिरे शाने पर और दबे दबे लहजे में कहे तुम ने अब तक बड़े दर्द सहे तुम तन्हा तन्हा जलते रहे तुम तन्हा तन्हा चलते रहे सुनो तन्हा चलना खेल नहीं, चलो आओ मिरे हम-राह चलो चलो नए सफ़र पर चलते हैं, चलो मुझे बना के गवाह चलो — Saqi Faruqi