ajeeb saanehaa mujh par guzar gaya yaaro | अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो

  - Shahryar

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साए से कल रात डर गया यारो

हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुँदला
हर एक ज़ख़्म मिरे दिल का भर गया यारो

भटक रही थी जो कश्ती वो ग़र्क़-ए-आब हुई
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो

वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो

मैं जिस को लिखने के अरमान में जिया अब तक
वरक़ वरक़ वो फ़साना बिखर गया यारो

  - Shahryar

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