तुम हमारे न हम तुम्हारे हैं
यानी हम दोनों बे-सहारे हैं
ऐसे हम दोनों हैं जुदा जैसे
एक दरिया के दो किनारे हैं
हम ने भी खोया है सुकूँ अपना
बाज़ी-ए-इश्क़ हम भी हारे हैं
इतनी उल्फ़त है तुम से मेरे सनम
जितने आकाश पे सितारे हैं
As you were reading Shayari by Safeer Ahmad
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