दिल में याद की ख़ुश्बू उठने वाली है

हल्की हल्की बारिश कितनी अच्छी है

फूल के जैसे खिलने लगा है मेरा दिल
हाथ पे आ कर जब से तितली बैठी है

होंटों पर कुछ गीत पुराने आते हैं
जब जब पाँव में पायल छम छम करती है

दिल तो सुख़न-गोई से बहला सकते हैं
उस का क्या हो रूह की जो बेचैनी है

कैसे सब का दिल सब से मिल जाएगा
सब की अपनी अपनी आदत होती है

— shampa andaliib

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