jitna ho saktaa hai main rehta hooñ | जितना हो सकता है मैं रहता हूँ

  - Sohil Barelvi

जितना हो सकता है मैं रहता हूँ
और हाँ मैं ख़मोश अच्छा हूँ

दस्तकें दे रहे मुझे सब लोग
और मैं चुपचाप घर में बैठा हूँ

मुझ को अपनाए या नहीं ये शजर
मैं यहाँ पर नया परिंदा हूँ

ये जो बैठे हैं मतलबी अच्छे
इन से थोड़ा बहुत तो सच्चा हूँ

मौत आई नहीं हुआ एहसास
मैं ये समझा अभी मैं ज़िंदा हूँ

चार छह लोग जानते हैं मुझे
मैं बहुत कम किसी पे खुलता हूँ

ये अलग बात तू समझता नहीं
तेरी महफ़िल का मैं भी हिस्सा हूँ

क्यूँँ कि मैं भी नहीं बताऊँगा अब
कोई पूछे नहीं मैं कैसा हूँ

  - Sohil Barelvi

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