ख़ुदा भी देखे है हैरत-ज़दा जानी
सियह-ख़ाने में पढ़ता हूँ दुआ जानी
ये मेरी बंदगी का नश्शा है जो मैं
जिसे देखूँ कहूँ तुम हो ख़ुदा जानी
मिरी रफ़्तार धीमी हो गई जब से
पस-ए-गर्द-ए-सफ़र मैं खो गया जानी
हमारी ही वो चीख़ें थीं जिसे हम ने
समझ रक्खा था इल्हाम-ए-ख़ुदा जानी
मुझे जब भी अँधेरे में निहाँ देखा
ग़ुबार-ए-शब से जुगनू लड़ गया जानी
इसी बाइस कभी ढूँढा नहीं मैं ने
कोई बोला ख़ुदा है जा-ब-जा जानी
तुम्हें सोहिल कहाँ तक कौन समझाए
बराए-नाम के हैं सब ख़ुदा जानी
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