मोहब्बत का जुनूँ सर पे चढ़ा था
समय से पहले ही मर सा गया था
दिलों से खेलना उसकी कला थी
मैं जिसके प्यार में पागल हुआ था
मुझे आता नहीं ख़ुद पे यक़ीं अब
मोहब्बत के लिए उसको चुना था
रक़ीब आ कर बताते हैं मुझे अब
मेरा महबूब उनका भी ख़ुदा था
मुझे कब हिज्र ये मंज़ूर था पर
मियाँ ये उस हसीं का फ़ैसला था
उसे भी छोड़ कर तुम आ गए हो
उसे तो तुम ने लाखों में चुना था
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