yahii sauda hua tha meraa gham men zindagi ke saath | यही सौदा हुआ था मेरा ग़म में ज़िंदगी के साथ

  - ABhishek Parashar

यही सौदा हुआ था मेरा ग़म में ज़िंदगी के साथ
किसी भी हाल में जाना नहीं है ख़ुद-कुशी के साथ

मेरी ख़ुशियों में शामिल था भले सारा ज़माना दोस्त
मगर अपने ग़मों को काटा मैंने शायरी के साथ

यहाँ पे कौन अपने दिल में रक्खेगा मुझे यारो
मैं उसके शहर में आया हुआ हूँ मुफ़्लिसी के साथ

ख़ुदाया और कितने दिन मुझे मर मर के जीना है
वो कब तक मुझ सेे यूँँ मिलती रहेगी बे-रुख़ी के साथ

बचाया करता था जो पल जो लम्हे उसकी ख़ातिर मैं
बिताने पड़ रहे हैं बेबसी में मय-कशी के साथ

अगर मुझ सेे मोहब्बत उसको होती ही नहीं है तो
ये मेरी ज़िंदगी कट जाए उसकी दोस्ती के साथ

मुझे उसके पिता से माँगना है हाथ उसका सो
मिलाना पड़ रहा है हाथ मुझको नौकरी के साथ

  - ABhishek Parashar

More by ABhishek Parashar

As you were reading Shayari by ABhishek Parashar

Similar Writers

our suggestion based on ABhishek Parashar

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari