मुझे इक शख़्स ऐसा भी मिला था
जो मेरा ग़म बख़ूबी जानता था
उसे मैं देखता ही रह गया था
मुझे पहली दफ़ा जब वो मिला था
किसी के झूठ को सच मान कर मैं
भरम की दुनिया में जीने लगा था
मेरा दिल भी पिघल जाता था यारों
मुझे जब प्यार से वो देखता था
मेरी क़िस्मत में तू था ही नहीं पर
तेरी ख़ातिर मैं क़िस्मत से लड़ा था
कोई दुश्मन समझता था मुझे और
किसी ने प्यार से अपना कहा था
मोहब्बत खा गई लड़का किसी का
किसी को कहते ये मैंने सुना था
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