कि अब तो ख़त्म है क़िस्सा हमारा
ख़ुदा जाने कि क्या होगा हमारा
सभी की है नज़र अच्छी मगर क्यूँँ
किसी को ग़म नहीं दिखता हमारा
मिले वो ख़्वाब में हम से किसी दिन
इसी ख़्वाहिश में दिन गुज़रा हमारा
ग़ज़ल में थी मोहब्बत भी मगर वो
समझती ही नहीं लिक्खा हमारा
समझ जाए मोहब्बत वो हमारी
अगर वो देख ले चेहरा हमारा
अगर है 'इश्क़ तो इज़हार कर के
भला थोड़ा बहुत करना हमारा
ख़ुशी तुम भी मना लो यार लेकिन
तुम्हें जो मिल गया वो था हमारा
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