वक़्त को हाथ से फिसलता देख
भीड़ में आदमी को तन्हा देख
चाँद भी देख और सितारा देख
फिर बदलता हुआ ज़माना देख
ज़िंदगी का नया तमाशा देख
रोज़ होता हुआ ख़सारा देख
यूँँ मुझे देखने से क्या होगा
कैसे दौलत को है कमाना देख
ख़ूबसूरत सी इन निगाहों से
ये सबा देख और सबेरा देख
रोज़ की बात है ये रंज-ओ-ग़म
फिर भी मुझको तू मुस्कुराता देख
मैं उसे रोज़ माँग लेता हूँ
एक टूटा हुआ सितारा देख
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