हम ने माना कि महका के घर रख दिया

  - Uday Pratap Singh

हम ने माना कि महका के घर रख दिया
कितने फूलों का सर काट कर रख दिया

तुम मेरे पास हो रात हैरान है
चाँद किस ने इधर का उधर रख दिया

एक लम्हे को सूरज ठहर सा गया
हाथ उस ने मेरे हाथ पर रख दिया

दे के कस्तूरी हिरनों की तक़दीर में
प्यास का एक लम्बा सफ़र रख दिया

तुम ने ये क्या किया बत्तियों की जगह
इन चराग़ों में आँधी का डर रख दिया

अपना चेहरा न पोंछा गया आप से
आईना बे-वजह तोड़ कर रख दिया

आख़िरी फ़ैसला वक़्त के हाथ है
सच ने तलवार के आगे सर रख दिया

देने वाले ये हस्सास नाज़ुक सा दिल
मेरे सीने में क्यूँँ ख़ास कर रख दिया

तुम 'उदय' चीज़ क्या हो कि इस प्यार ने
देवताओं का दिल तोड़ कर रख दिया

  - Uday Pratap Singh

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