jaane kitne ghate-badhe honge | जाने कितने घटे-बढ़े होंगे

  - Vikas Rana

जाने कितने घटे-बढ़े होंगे
मुद्दतें हो गईं सितारे गिने

  - Vikas Rana

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As you were reading Shayari by Vikas Rana

    मुझको ये मालूम नहीं था तुमसे मिलने से पहले दोस्त
    जल्दी आँखें भरने वालों के मन जल्दी भर जाते हैं
    Vikas Rana
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    तुम्हारे बाद के बोसों में जानाँ
    तुम्हारी सांस की ख़ुशबू नहीं थी
    Vikas Rana
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    सोचता हूँ के यूँ न हो इक दिन
    ये ज़मीं कोई आसमाँ निकले
    Vikas Rana
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    कोई तितली पकड़ लें अगर
    फूल पर रख दिया कीजिए
    Vikas Rana
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    तेरे पहलू या दरमियाँ निकले
    एक जाँ है कहाँ कहाँ निकले

    इस तरह से कभी समेट मुझे
    मेरे खुलने पर इक जहाँ निकले

    सोचता हूँ यूँ न हो इक दिन
    ये ज़मीं कोई आसमाँ निकले

    आ तिरी साँस साँस पी लूँ मैं
    जिस्म से रूह का धुआँ निकले
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    Vikas Rana

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