phoolon se dosti hui hi nahin | फूलों से दोस्ती हुई ही नहीं

  - Viru Panwar

फूलों से दोस्ती हुई ही नहीं
मुझ से ख़ुशबू तेरी गई ही नहीं

दुनिया में वो सभी रहे गुमनाम
जिन पे तेरी नज़र पड़ी ही नहीं

गया बेकार रोज़ का मिलना
उसे आदत मेरी लगी ही नहीं

तुम बहुत ही हसीन हो लेकिन
उस की कोई बराबरी ही नहीं

सिर्फ़ चेहरा ही देखा है उस का
उस की आवाज़ तो सुनी ही नहीं

उस को पैग़ाम भेजते कैसे
उस तरफ़ की हवा चली ही नहीं

शायरी से लगाव हो जिस को
ऐसी लड़की मुझे मिली ही नहीं

  - Viru Panwar

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