Wasim Jamshedpuri

Wasim Jamshedpuri

@WasimJamshedpuri

Wasim Jamshedpuri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Wasim Jamshedpuri's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

घर के बाहर सभी सियासत रख शान दस्तार की सलामत रख — Wasim Jamshedpuri
तिलमिलाते हैं दुआ से दिल-जले अहबाब में आज कल आते हैं मेरे ज़ाविये सुरख़ाब में — Wasim Jamshedpuri
ख़ुद से ही गुफ़्तुगू उम्र-भर तक रही गुफ़्त की गूँज दिल से नगर तक रही — Wasim Jamshedpuri

Ghazal

Nazm

"अक़्द" दिल में हैं वहशत और निगाहों में तलातुम आहू हैं तक़दीर में तुम से जो हक़-मेहर हुए वो आँसू हैं कमज़ोर बिखरे से खुले हैरत में मेरे गेसू हैं रिश्तों के दश्त-ए-ग़म में साया ढूँढ़ता बिसरा तू हैं तारीख़ बदली तुम ने फिर इंसाफ़ के आग़ाज़ की परवाह आख़िर हो गई तुम्हें भी अब अंजाम की बे-आब दिल में शाद बंजारा रहे आहंग से सिंदूर बिन माँग हूए ख़ुश्क से बे-रंग से मैं बात उन सेे क्या कहूँ हैं जिन के रब दिल तंग से क्यूँँ ज़िंदगी के ढंग हैं इतने भला बे-ढंग से गुलशन-ए-लाला इश्क़ है तुम्हें अगर तज्दीद से दामन बचा कर चल रहे हो क्यूँँ यहाँ तन्क़ीद से गुलशन न कोई आप के पहलू से अब आज़ाद हो दाना न क्यूँँ कोई दे जाए तुम अगर सय्याद हो जो कर सके शब मुझ पे वो ताज़ा सितम ईजाद हो बर्बाद कोई हो बला से आप पर आबाद हो जब तुम ने पहनाए थे मुझ को पैरहन ज़ेवर नए और फिर जो दिखलाए थे आलम के सभी मंज़र नए हैं तजरबे की बात ये तुम तजरबा तो लो ज़रा ख़ामोश क्यूँँ हो बज़्म में जो हो सके बोलो ज़रा हैं राज़ जो उस राज़ से सब राज़ को खोलो ज़रा तोला है मुझ को जिस में अब ख़ुद को भी तो तोलो ज़रा — Wasim Jamshedpuri