Abdullah Minhaj khan

Abdullah Minhaj khan

@ak0335226

Abdullah Minhaj khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Abdullah Minhaj khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

0

Content

8

Likes

7

Shayari
Audios
  • Sher(4)
  • Ghazal(4)

Sher

मैं किसी और से अब इश्क़ करूँँ तेरे बा'द मेरे दिल ने ये इजाज़त ही नहीं दी मुझ को — Abdullah Minhaj khan
अब बनेगी न कोई बात चलो सो जाऍं अश्क बन जाए न बरसात चलो सो जाऍं — Abdullah Minhaj khan

Ghazal

मोहब्बत मेरे जीने का सहारा हो तो अच्छा है ये दिल उन की निगाहों का नज़ारा हो तो अच्छा है ब-ज़ाहिर तो मुलाक़ातें तुम्हारी हम से होती हैं तुम्हारा हर घड़ी हम को इशारा हो तो अच्छा है बदल जाएँ जो इक पल में कभी भी रास न आएँ तो ऐसे दोस्तों से भी किनारा हो तो अच्छा है हमारे जैसे थे अहबाब जैसी उन की बातें थीं हमारा भी उन्हीं जैसा नज़ारा हो तो अच्छा है हम अपने दुश्मनों को भी सदा ख़ुश-हाल रखते हैं हमारा चाहे ग़ुर्बत में गुज़ारा हो तो अच्छा है मोहब्बत ऐसी शय है जिस को हम कुछ कह नहीं सकते फिर इस के बदले में चाहे ख़सारा हो तो अच्छा है वफ़ा की राह पर मिनहाज चलते जाएँगे लेकिन बुलंदी पर मुक़द्दर का सितारा हो तो अच्छा है — Abdullah Minhaj khan
तुम्हारा ऐसे घर जाना बहुत तकलीफ़ देता है लड़ाई हम से कर जाना बहुत तकलीफ़ देता है ब-ज़ाहिर इश्क़ का इज़हार कर तो लेती है लेकिन मगर उस का मुकर जाना बहुत तकलीफ़ देता है वो जिस ने मुझ को हर इक मोड़ पे आ कर सँभाला है अब उस का यूँँ बिखर जाना बहुत तकलीफ़ देता है बुलंदी से उतर कर कोई भी मरता नहीं लेकिन निगाहों से उतर जाना बहुत तकलीफ़ देता है जहाँ से चल के मीलों आ गए हैं सू-ए-मंज़िल हम पलट कर फिर उधर जाना बहुत तकलीफ़ देता है किसी से इश्क़ में मिनहाज दुश्वारी नहीं लेकिन मगर हद से गुज़र जाना बहुत तकलीफ़ देता है — Abdullah Minhaj khan