हर तरफ़ है तेरा असर उर्दू

सब के दिल में है तेरा घर उर्दू

उन की तहज़ीब हो गई रुख़्सत
तुझ से फेरे हैं जो नज़र उर्दू

हम जहाँ भी गए यही देखा
तेरा चर्चा है हर नगर उर्दू

जाने क्या हाल होता नस्लों का
हम नहीं सीखते अगर उर्दू

हर जगह तू ही तू नज़र आई
हम गए हैं जिधर जिधर उर्दू

इस लिए तू पसंद है सब को
तेरा लहजा है कार-गर उर्दू

ज़िंदा रखना है इस लिए मिंहाज
हम पढे़ंगे ख़रीद कर उर्दू

— Abdullah Minhaj khan

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