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Top 10 of
Akhtar Shirani
SHER
10
GHAZAL
मुझे अपनी पस्ती की शर्म है तिरी रिफ़अ'तों का ख़याल है
मगर अपने दिल को मैं क्या करूँँ उसे फिर भी शौक़-ए-विसाल है
Akhtar Shirani
9
GHAZAL
वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए
रात दिन सूरत को देखा कीजिए
Akhtar Shirani
8
SHER
मुद्दतें हो गईं बिछड़े हुए तुम से लेकिन
आज तक दिल से मिरे याद तुम्हारी न गई
Akhtar Shirani
7
SHER
अब तो मिलिए बस लड़ाई हो चुकी
अब तो चलिए प्यार की बातें करें
Akhtar Shirani
6
SHER
थक गए हम करते करते इंतिज़ार
इक क़यामत उन का आना हो गया
Akhtar Shirani
5
SHER
उठते नहीं हैं अब तो दुआ के लिए भी हाथ
किस दर्जा ना-उमीद हैं परवरदिगार से
Akhtar Shirani
4
SHER
दिन रात मय-कदे में गुज़रती थी ज़िंदगी
'अख़्तर' वो बे-ख़ुदी के ज़माने किधर गए
Akhtar Shirani
3
SHER
ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते
Akhtar Shirani
2
SHER
काँटों से दिल लगाओ जो ता-उम्र साथ दें
फूलों का क्या जो साँस की गर्मी न सह सकें
Akhtar Shirani
1
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