न साथी है न मंज़िल का पता है
मोहब्बत रास्ता ही रास्ता है
मोहब्बत रास्ता ही रास्ता है
वफ़ा के नाम पर बर्बाद हो कर
वफ़ा के नाम से दिल काँपता है
मैं अब तेरे सिवा किस को पुकारूँ
मुक़द्दर सो गया ग़म जागता है
वो सब कुछ जान कर अंजान क्यूँ हैं
सुना है दिल को दिल पहचानता है
ये आँसू ढूँडता है तेरा दामन
मुसाफ़िर अपनी मंज़िल जानता है
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हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे
अब ज़िंदगी से ज़िंदगी महरूम हो गई
अब ज़िंदगी से ज़िंदगी महरूम हो गई
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जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई
उन की निगाह और भी मासूम हो गई
उन की निगाह और भी मासूम हो गई
हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे
अब ज़िंदगी से ज़िंदगी महरूम हो गई
क़ल्ब ओ ज़मीर बे-हिस ओ बे-जान हो गए
दुनिया ख़ुलूस ओ दर्द से महरूम हो गई
उन की नज़र के कोई इशारे न पा सका
मेरे जुनूँ की चारों तरफ़ धूम हो गई
कुछ इस तरह से वक़्त ने लीं करवटें 'असद'
हँसती हुई निगाह भी मग़्मूम हो गई
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