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Top 10 of
Ghulam Mohammad Qasir
SHER
कहते हैं इन शाख़ों पर फल फूल भी आते थे
अब तो पत्ते झड़ते हैं या पत्थर गिरते हैं
Ghulam Mohammad Qasir
10
GHAZAL
नज़र नज़र में अदा-ए-जमाल रखते थे
हम एक शख़्स का कितना ख़याल रखते थे
Ghulam Mohammad Qasir
9
SHER
नाम लिख लिख के तिरा फूल बनाने वाला
आज फिर शबनमीं आँखों से वरक़ धोता है
Ghulam Mohammad Qasir
8
SHER
तेरी आवाज़ को इस शहर की लहरें तरसती हैं
ग़लत नंबर मिलाता हूँ तो पहरों बात होती है
Ghulam Mohammad Qasir
7
SHER
ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का
कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है
Ghulam Mohammad Qasir
6
SHER
बारूद के बदले हाथों में आ जाए किताब तो अच्छा हो
ऐ काश हमारी आँखों का इक्कीसवाँ ख़्वाब तो अच्छा हो
Ghulam Mohammad Qasir
5
GHAZAL
कहीं लोग तन्हा कहीं घर अकेले
कहाँ तक मैं देखूँ ये मंज़र अकेले
Ghulam Mohammad Qasir
4
GHAZAL
कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला
और डूबने वालों का जज़्बा भी नहीं बदला
Ghulam Mohammad Qasir
3
GHAZAL
बग़ैर उस के अब आराम भी नहीं आता
वो शख़्स जिस का मुझे नाम भी नहीं आता
Ghulam Mohammad Qasir
2
SHER
1
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