Rafiq Usmani

@rafiq-usmani

Rafiq Usmani shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rafiq Usmani's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

उस के मुँह का कड़वा बोल भी कैसा था दूध में जैसे शहद मिला हो लगता था — Rafiq Usmani

Ghazal

उस के मुँह का कड़वा बोल भी कैसा था दूध में जैसे शहद मिला हो लगता था खुली हवा में उड़ते उड़ते मर जाना क़फ़स में रह कर जीने से तो अच्छा था शादी हो जाने पर बेटा भूल गया बेवा माँ ने कैसे उस को पाला था आज मैं उस का हाथ पकड़ कर चलता हूँ कल जो मेरी उँगली था में चलता था अब तो उस में यादों का है शोर बहुत मन का आँगन पहले कितना सूना था सोच रहा था आप मिरे घर में कैसे आँख खुली तो समझ में आया सपना था दिन भर हँसता फिरता था जो सड़कों पर वो पागल तन्हाई में अक्सर रोता था सर को ऊँचा कर के जो चलता था 'रफ़ीक़' अस्ल में मुझ से क़द में ज़रा वो छोटा था — Rafiq Usmani
कोई देखे तो ज़रा कैसी सज़ा देता है मेरा दुश्मन मुझे जीने की दुआ देता है हाकिम-ए-वक़्त भी हालात से आजिज़ आ कर वक़्त के सामने सर अपना झुका देता है क्या हुआ तू ने जो ग़ुर्बत में छुड़ाया दामन ऐसे हालात में हर कोई दग़ा देता है लुत्फ़ आता नहीं हो कर भी शिकम-सेर तुम्हें हम ग़रीबों को तो फ़ाक़ा भी मज़ा देता है दूर आकाश में उड़ता हुआ सूखा पत्ता आने वाले किसी तूफ़ाँ का पता देता है हाथ फैलाऊँ किसी ग़ैर के आगे क्यूँँ-कर मुझ को हर चीज़ बिना माँगे ख़ुदा देता है जिस की आवाज़ को सुन कर मैं तड़प जाता हूँ मेरे अंदर से मुझे कौन सदा देता है कोई मंज़िल पे नहीं छोड़ता ले जा के 'रफ़ीक़' हर कोई दूर से बस राह दिखा देता है — Rafiq Usmani