is tarah vo kar raha tha aah-o-giryaa ret par | इस तरह वो कर रहा था आह-ओ-गिर्या रेत पर

  - zaid alif siddique

इस तरह वो कर रहा था आह-ओ-गिर्या रेत पर
जिस तरह पानी को तरसे कोई प्यासा रेत पर

जब कभी मैंने किया चर्चा तुम्हारा रेत पर
रक़्स करता आ गया झोंका हवा का रेत पर

जब हमारे ख़्वाब टूटे तब ये अंदाज़ा हुआ
गिर गया था कैसे एक टूटा सितारा रेत पर

आ रही थी एक उजली सी किरन भी रेत से
उंगलियों से जब बना चेहरा तुम्हारा रेत पर

  - zaid alif siddique

More by zaid alif siddique

As you were reading Shayari by zaid alif siddique

Similar Writers

our suggestion based on zaid alif siddique

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari