कहता है उसको प्यार का मतलब नहीं पता
इस दिल को बेक़रार का मतलब नहीं पता
क्यूँँ ढूँढते हो मुझको बहारों के आस पास
क्या तुमको कू-ए-यार का मतलब नहीं पता
सय्याद कर रहा था परिंदों को कल रिहा
शायद उसे शिकार का मतलब नहीं पता
सूरज से जंग जीतने निकला है नामुराद
जाहिल को रेगज़ार का मतलब नहीं पता
हर बार कह रही हो तबीअत ख़राब है
क्या मुझको बार बार का मतलब नहीं पता
अहल-ए-अदब से दोस्ती अच्छी नहीं है 'ज़ैद'
इनको तो रोज़गार का मतलब नहीं पता
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