betiyon kii din dahade laaj lutti dwaar par | बेटियों की दिन दहाड़े लाज लुटती द्वार पर

  - Prashant Arahat

बेटियों की दिन दहाड़े लाज लुटती द्वार पर
अब भरोसा है नहीं मुझको तो चौकीदार पर

फूल सी बेटी थी उसकी रौंद डाला जिस्म को
खेलती थी वो अकेली साँझ को ही द्वार पर

हैं कहाँ सरकार के हाकिम मुलाज़िम ये सभी
पूँछता हूँ मैं यही बस देश के सरदार पर

धमकियाँ वो दे रहे हैं डाल देंगे जेल में
जिसने भी उँगली उठाई अबकी जो सरकार पर

फूँक कर वो घर हमारा जा रहे हैं देख लो
आज भी हम हैं मगर सच के ही पैरोकार पर

दर्द बेटी का लिखा है बाप के आँसू लिखे
वाह अरहत की ज़रूरत है नहीं अश'आर पर

  - Prashant Arahat

More by Prashant Arahat

As you were reading Shayari by Prashant Arahat

Similar Writers

our suggestion based on Prashant Arahat

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari