हमें तुम सेे मोहब्बत हो गई है
बड़ी नाज़ुक तबीअत हो गई है
नहीं लगता कहीं भी दिल हमारा
न जाने कैसी हालत हो गई है
लबों ने छू लिया है फिर लबों को
लबों से फिर शरारत हो गई है
गले जब से लगाया हम ने तुम को
ग़मए-दुनिया से फ़ुर्सत हो गई है
वफ़ा से सबका दिल अब उठ रहा है
वफ़ा मानो सियासत हो गई है
बड़े ख़ामोश से रहते हो अरहम
तुम्हें ये किस की आदत हो गई है
— Mohd Arham















