लगी है भूख फिर भी चुप खड़ी है
वो इक लड़की जो अपने बाप सी है
मुझे काँधे पे बैठा लो न बाबा
ज़मीं से दुनिया छोटी लग रही है
मेरा कमरा बयाबाँ हो गया है
तेरी तस्वीर जब से खो गई है
मैं इतना रोया हूँ तुझ से बिछड़ कर
मेरी आँखों में मिट्टी रह गई है
लगे जो आँख तो मैं ख़्वाब देखूँ
अभी तो नींद से बस दुश्मनी है
कोई गोशा नहीं आबाद मुझ
में
मेरी हर शय बयाबाँ हो चुकी है
— Mohd Arham















