रुला दे तुझ को भी रोना हमारा
बस इतना गहरा हो रिश्ता हमारा
कभी तो हो हमें जाने की जल्दी
कभी तो रोके तू रस्ता हमारा
करे तू मिन्नतें मिलने की मुझ से
कहूँ मैं ज़ाया' है मिलना हमारा
ख़फ़ा वो मुझ से है इस बात पे अब
कि होता क्यूँ नहीं झगड़ा हमारा
ज़रा सी देर को सद
में में हो हम
ज़रा सी देर हो मिलना हमारा
— Mohd Arham















