ऐसा लगता है देखी दाखी है

  - Mohd Arham

ऐसा लगता है देखी दाखी है
ज़िंदगी कोई फ़िल्म जैसी है

पाँव फैला के देखा तो जाना
दुनिया कमरे से ज़्यादा छोटी है

हिज्र के दिन हैं और घड़ी उस पर
जाने क्यूँ उल्टे पाँव चलती है

हाफ़िज़ा कौन कर रहा है मेरा
किसके रटने से हिचकी आई है

एक रस्ता है आप तक जाता
और उस
में भी अफ़रा तफ़री है

मैं मुदावा करुँगा क्यूँँ ग़म का
मुझको प्यारी मेरी उदासी है

  - Mohd Arham

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