ये मेरा ग़म भी तो कुछ कम नहीं है
कि हम दोनों बिछड़ के हम नहीं है
मैं वो था जो बिछड़ के मर गया था
तू वो है जिस को कोई ग़म नहीं है
करूँ मैं क्या गिला उस बे-वफ़ा से
बिछड़ के आँख जिस की नम नहीं है
पुकारो मत मुझे उस नाम से अब
जो बिछड़े यार वो हमदम नहीं है
मेरा दिल भी कहीं अब लग चुका है
तेरे दिल में भी अब 'अरहम' नहीं है
— Mohd Arham















