पीर मुरशिद के पास मत जाना
अच्छे ज़ाहिद के पास मत जाना
कुछ भी रद्द-ओ-बदल नहीं होगा
सच्चे शाहिद के पास मत जाना
नब्ज़ अंदर से खोखला हो जब
दिल के आबिद के पास मत जाना
तुम को अपना बना के रक्खेगा
एक वाहिद के पास मत जाना
एक सजदे से काम बनता है
आप मस्जिद के पास मत जाना
कर के ग़लती ये मैं ने देखा है
अब से मुल्हिद के पास मत जाना
जो सनम की करे इबादत तुम
ऐसे साजिद के पास मत जाना
— Arohi Tripathi















