aaz main ye kah rahi hooñ zindagi ko alvida | आज़ मैं ये कह रही हूँ ज़िंदगी को अलविदा

  - Arohi Tripathi

आज़ मैं ये कह रही हूँ ज़िंदगी को अलविदा
बात सारी ख़त्म करके शायरी को अलविदा

एक बोला काट दो फिर एक बोला मार दो
मार दो हमको अगर हो तीरगी से अलविदा

किस तरह से है गुज़रता कौन पूछे हाल को
मौत आसाँ हो अगर तो मुफ़लिसी से अलविदा

जिस्म की चाहत सभी को रूह से मतलब किसे
ऐ ख़ुदा सारे तेरे इन मुत्तक़ी से अलविदा

कौन है अपना यहाँ सब जानकर अनजान हैं
हाल इसका देखकर अब बम्बई से अलविदा

  - Arohi Tripathi

Badan Shayari

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