दु'आओं में असर देखा
तुम्हें पाया जिधर देखा
नज़र तुम पर टिकी जा कर
तुम्हें बस इक नज़र देखा
बहुत नाराज़ था मुझ से
पलटकर फिर मगर देखा
हुआ मायूस मेरा दिल
जब इक सूखा शजर देखा
उठेगी मौज़ सागर में
मुझे तुम ने अगर देखा
— Ashok Sagar
तुम्हें पाया जिधर देखा
नज़र तुम पर टिकी जा कर
तुम्हें बस इक नज़र देखा
बहुत नाराज़ था मुझ से
पलटकर फिर मगर देखा
हुआ मायूस मेरा दिल
जब इक सूखा शजर देखा
उठेगी मौज़ सागर में
मुझे तुम ने अगर देखा
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