मुझे जिस सेे मुहब्बत है

बहुत ही ख़ूब-सूरत है

अँगूठी उस ने ले ली है
पहन ले तो ग़नीमत है

मुझे वो मिल नहीं सकती
मगर पाने की हसरत है

लिखा है ये सभी ख़त में
मेरा ये आख़िरी ख़त है

मुहब्बत नाम की है अब
जिधर देखो तिजारत है

नज़र जो फेर ली उस ने
क़यामत ही क़यामत है

— Ashok Sagar

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