हर मिलने वाले में बसी हैं काम की चालाकियाँ
आने लगी मुझ को समझ आवाम की चालाकियाँ
वो है नहीं फिर भी मुझे दिखने लगा है हर जगह
ऐसे मिरे पीछे पड़ी हैं जाम की चालाकियाँ
गालों को उसके यूँँ शफ़क़ ने छू लिया पहले मिरे
देखो है कितनी ख़ूबसूरत शाम की चालाकियाँ
भेजा था मैंने इक अधूरा दिल उसे ये सोच कर
शायद वो कुछ समझे मिरे पैग़ाम की चालाकियाँ
पेंसिल से लेकर वक़्त तक अपना सभी को है दिया
बचपन से मुझ में रह गईं बस नाम की चालाकियाँ
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