jisko rab ka pata nahin milta | जिसको रब का पता नहीं मिलता

  - Dharamraj deshraj

जिसको रब का पता नहीं मिलता
उसको ग़म में मज़ा नहीं मिलता

देवता तो बहुत यहाँ मिलते
आदमी का पता नहीं मिलता

अपने रब की तलाश में गुम हैं
वो हमें क्यूँँ भला नहीं मिलता

जो न पागल हुए मुहब्बत में
सिर्फ़ उसको ख़ुदा नहीं मिलता

मौत ही तो यहाँ यक़ीनी है
ज़िन्दगी का पता नहीं मिलता

लुत्फ़ आता जिसे रुलाने में
बस वही ग़मज़दा नहीं मिलता

हाल-ए-दिल जिस
में 'धर्म' कह देते
सिर्फ़ वो क़ाफ़िया नहीं मिलता

  - Dharamraj deshraj

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