तू नहीं ग़म भी तेरा प्यारा है
सिर्फ़ कह दे कि तू हमारा है
मौत का भी नहीं रहा है डर
दर्दोग़म ने हमें निख़ारा है
आपसे इश्क़ हो गया शायद
आप का हर सितम गवारा है
ज़ीस्त का क्या हिसाब दूँ यारों
वक़्त गुज़रा नहीं गुज़ारा है
ज़ख़्म पाकर भी ख़ुश हुआ यारो
ज़ख़्म ने ज़िस्म को निखारा है
मुझ को ग़म में सिखा दिया रोना
यार एहसान सब तुम्हारा है
हुक्म पाते ही चल दिया इन्साँ
आसमानों ने जब पुकारा है
— Dharamraj deshraj















