जाने किस -किसको खा गई मिट्टी
ज़ीस्त क्या है बता गई मिट्टी
जो जहाँ को बता चुके अपना
उनको अपना बना गई मिट्टी
जिनका दुनिया में नाम चलता था
उनको अपना बना गई मिट्टी
चार काँधे पे जब गया कोई
नींद में था जगा गई मिट्टी
पास सब कुछ था अब नहीं कुछ भी
आईना जब दिखा गई मिट्टी
आम इंसान की विसात कहाँ
आसमानों को खा गई मिट्टी
दोस्त -दुश्मन सभी को ग़म उसका
जिसको दूल्हा बना गई मिट्टी
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