क्या मेरी ज़िन्दगी भी देखी है
ग़म में डूबी हँसी भी देखी है
आपकी दुश्मनी पता यारों
क्या मेरी दोस्ती भी देखी है
तीरगी के नहीं हैं हम क़ायल
हमने तो रौशनी भी देखी है
मेरे ज़ख़्मों से खेलना यारों
आपकी दिल-लगी भी देखी है
ख़ौफ़ में फूल ही नहीं हमने
कसमसाती कली भी देखी है
उसका दावा है जानता है मुझे
उसने मेरी हँसी भी देखी है
कह रहे हो धरम भी है फ़ानी
क्या मेरी शा'इरी भी देखी है
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