आप थोड़ा जो मुस्कुरा देते
दर्दो-ग़म हम सभी भुला देते
उम्र भर बस उन्हें दु'आ देते
मुझको मुझ सेे अगर मिला देते
यार होते अगर जो तुम मेरे
मुस्कुराने का मशवरा देते
जाने होते फ़ना यहॉं कितने
रुख़ से पर्दा ज़रा हटा देते
कितने नादान हैं जहाँ वाले
आदमी को ख़ुदा बना देते
सिर्फ़ मंज़िल का ज़िक्र भर करते
अपनी नाकामियाँ भुला देते
यार तुमको 'धरम' समझ लेता
सो रहा था अगर जगा देते
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