पेड़ पे रह लू या पिंजरे में रहूँ मैंसाथ तेरा गर मिले सब कुछ सहूँ मैंकोई भी मेरा न था आगे न होगाएक तू ही है जिसे अपना कहूँ मैं— "Dharam" Barot