momoz pizza aur burger ko rakha hai ik taraf | मोमोज़ पिज़्ज़ा और बर्गर को रखा है इक तरफ़

  - "Dharam" Barot

मोमोज़ पिज़्ज़ा और बर्गर को रखा है इक तरफ़
खाने को हर दिन माँ की रोटी का मज़ा है इक तरफ़

तालाब में पानी की क़िल्लत गाँव में पीने को और
कोई समंदर को बना मीठा रहा है इक तरफ़

आसान लगते रास्ते आते नहीं है रास यार
गर हो परिस्थितियाँ कठिन वो रास्ता है इक तरफ़

मेरे सफ़र को नाम बहुतों ने दिया क़िस्मत मगर
क़िस्मत को कैसे था चलाना जानना है इक तरफ़

उसने जताया इस क़दर हक़ सोच में था मैं पड़ा
थी दोस्ती पर 'इश्क़ सा मुझको लगा है इक तरफ़

ये दोगलेपन से बने रिश्ते लगे अच्छे 'धरम'
लंबा नहीं चलता ये रिश्ता देखना है इक तरफ़

  - "Dharam" Barot

Charagh Shayari

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