लोग भूखे हैं मोहब्बत के यहाँ परबेच नफ़रत क्यूँ रहे हो तुम जहाँ परबाँट दोगे इस जहाँ को दो धड़ों मेंफिर बताओ अम्न आना है कहाँ पर— "Dharam" Barot