मौसम सुहाना आया बारिश का यही आसार है
सुर से भरा जो सुन रहे हो राग वो मल्हार है
उस आख़िरी उम्मीद का भी टूट जाना हार क्या
बस इक सफ़र है ज़िंदगी क्या जीत है क्या हार है
कुछ छूट जाता है तो कुछ मिल जाता है तू छोड़ सब
चल चलते हैं हम घूमने तू आने को तैयार है
तू दोस्त अच्छा है मगर यूँँ ख़्वाब में मत आया कर
मैंने भी उस सेे पूछा क्या ये 'इश्क़ का इज़हार है
है बात तो तेरी सही पर बाद इसके दोस्त क्या
सच में हमारे बीच में रह पाएगा जो प्यार है
इक सोच मुझ पर भारी हो सकती है माना ये मगर
क्या है ग़लत क्या है सही ये जानता फ़नकार है
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