बसा जो शख़्स आँखों में है ओझल क्यूँँ नहीं होताये पहला इश्क़ ही अक्सर मुकम्मल क्यूँ नहीं होतायहाँ शहरों में ऐवानों के साए ही मुयस्सर हैंयहाँ गाँवों के जैसा कोई पीपल क्यूँ नहीं होता— AYUSH SONI