उसके हाथों में लिखी सुंदर सी जो तहरीर है
कोई अफ़साना नहीं वो तो मेरी तक़दीर है
कोई सुलझाए ज़रा इन आशिक़ों का मसअला
थोड़ा पेचीदा नहीं ये मामला गंभीर है
भूलना तो चाहता है दिल मेरा पर क्या करे
मेरे कमरे की दिवारों में तेरी तस्वीर है
ख़्वाब मेरे है बहुत, आज़ाद उड़ना है मगर
पैर में भी बेड़ियाँ है हाथ में ज़ंजीर है
जानना गर चाहते हो हाल मेरा तो सुनो
एक ही ये ज़िन्दगी है हालत–ए–कश्मीर है
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